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» » Let's know about scientific achievements आइए जानते हैं वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में

अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में विज्ञान के कदम बहुत ही तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कई तरह की खोज करने में सफलता प्राप्त की है। विज्ञान को मानव जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।


पिछले कुछ दशकों में विज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई है। वैज्ञानिकों ने कई तरह की सफल खोजे की हैं। विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास हुआ है।
  
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का क्षेत्र हर दिन एक नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। हर साल कुछ नया इसके खाते में जुड़ता जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2016 भी अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है। इस वर्ष भी वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, चिकित्सा, ऊर्जा तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां हासिल की है।
जहां गुरुत्वीय तरंगों की खोज से ब्रह्मांड के अध्ययन का नया रास्ता खुला, वही अमेरिका अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा प्रक्षेपित 'जूनो' नामक अंतरिक्ष यान 4 जुलाई 2016 को बृहस्पति पर पहुंचा।


इसी क्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 20 उपग्रहों का पीएसएलवी सी 34 रॉकेट द्वारा सफल प्रमोचन और उसे निर्धारित कक्षा में स्थापित करके सफलता के एक नए शिखर को छुआ है। इसमें भारत सहित इंडोनेशिया, जर्मनी, कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के उपग्रह भी शामिल थे। AD
कागज से पतली LED की खोज की गई, तो वहीं चीन का सबसे तेज चलने वाले सुपर कंप्यूटर के निर्माण में सफलता प्राप्त हुई। एनिमेशन में 3-डी तकनीक का प्रयोग करते हुए पहला कोमल काया वाला रोबोट आक्टोबोट बनाया गया। चिकित्सा के क्षेत्र में भी वैज्ञानिकों को हड्डियों को जोड़ने की नई तकनीक के साथ-साथ पीड़ित अंगों को पुनः प्रभावी करने के लिये महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की।
ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा की गई एक बड़ी खोज के अनुसार पिछले 6 वर्षों से गहन मानसिक विकृति से पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में एक छोटी चिप प्रत्यारोपित करने पर उसके अंगों में सक्रियता देखी गई।
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वर्तमान में अंतरिक्ष अनुसंधान के दिशा में दिन-प्रतिदिन भारत का स्थान तेजी से ऊंचा होता जा रहा है। मंगलयान के सफल प्रमोशन के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 'इसरो' का लोहा पूरी दुनिया मान रही है।


इसी क्रम से इस वर्ष भी द्वारा 22 जून को एक साथ एक ही उड़ान में 20 ग्रहों का पीएसएलवी सी 34 राॅकेट द्वारा सफल प्रमोचन किया गया तथा तथा उन्हें उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया।
             
20 उपग्रहों में से 17 अन्य देशों के और तीन भारत के थे। इस अभियान में सम्मिलित सत्यभामा उपग्रह का निर्माण चेन्नई सत्यभामा विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया है।
उसके उपग्रह का उपयोग ग्रीन हाउस गैस एजेंसी की कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, जल वाष्प तथा हाइड्रोजन फ्लोराइड के बारे में आंकड़े एकत्र करने में किया जाएगा। स्वयं नामक उपग्रह का निर्माण पूणे के 'कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग' के छात्रों ने किया है। इसका काम शौकिया रेडियो(हैम रेडियो) के क्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश वा सेवाएं प्रदान करना है। कार्टोसैट-2 सी का वजन 728 किलोग्राम है, इस उपग्रह द्वारा भेजे गए चित्रों का उपयोग बहुत सारे कामों में आएगा।
      
जैसे कि भारत का मानचित्र, ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी, समुद्र तटीय क्षेत्रों में भूमि का उपयोग, सड़क निर्माण की निगरानी, जल स्त्रोतों का अध्ययन आदि। AD
         
विज्ञान इस युग का एक ऐसा सच है, जिसने दुनिया को कहां से कहां पहुंचा दिया है। कोई भी इस बात से परिचित नहीं है कि विज्ञान का महत्व अपने आप में बहुत ही रोचक है। इसके बिना किसी भी चीज की कल्पना करना नामुमकिन है।

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