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» » The rise of science in India भारत में विज्ञान का उदय

नेहरु जी का मानना था कि वे भविष्य में उन्हीं के साथ है जो विज्ञान को बढ़ावा देते हैं और वैज्ञानिकों से मित्रता रखते हैं। वस्तुतः नेहरू विज्ञान और प्रौद्योगिकी को भारतीय जन-जीवन और भारतीय संस्कृति का अभिन्न और अनिवार्य अंग बना देना चाहते थे। सच यही है कि नेहरू स्वाधीन भारत में वैज्ञानिक क्रांति के अग्रदूत और वैज्ञानिक संस्कृति के जनक थे। उनके अथक प्रयासों की आधारशिला पर ही आज वैज्ञानिक भारत का वाजूद निर्मित हो सका है। वर्तमान में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार और औद्योगिक विस्तार का ढांचा निर्मित हो सका है, उसकी पूरी योजना भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
 
The rise of science in India
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आजादी के पूर्व तक अंग्रेजों को यही मनसा रही कि भारत उनके लिए कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता तथा निर्माताओं के उत्पादनों का उपभोकता बना रहे। इस नाते ब्रिटिशकालीन भारत में ऐसे उद्योग पनपने ही नहीं दिए गए जो आत्मनिर्भरता की ओर भारत की गतिशीलता में अपनी कोई भूमिका निभाहे और इसी नाते जब-जब देशवासियों ने औद्योगिक तानाबाना बुना तो उनको कदम-कदम पर मुसीबतें झेलनी पड़ी फिर भी भारत धीरे-धीरे विकास की राहे खोजता रहा। उद्योग ही नहीं शिक्षा, अनुसंधान आदि सभी क्षेत्रों में भारतवासियों की न तो सराहना ही की जाती है और न ही कोई प्रोत्साहन मिलता था। लेकिन जब भारत ने आजादी की हवा में सांस ली और विकास के लिए अपने पंख पसारे। स्वप्नदर्शी नेहरू ने अपने देश में विस्तार का तानाबाना बुना और आजाद भारत में औद्योगिक क्रांति के बीज बोये। AD
नए नए उद्योगों को उन्होंने न सिर्फ आसरा दिया बल्कि देश में वैज्ञानिक शिक्षा और अनुसंधान का खास माहौल भी बनाने की हर संभव कोशिश की। उन्होंने देश में विज्ञान को स्थापित किया, उनसे जो साइंटिफिक टेंपो बना, वह निरंतर आगे बढ़ता गया और दो दशकों के अंदर ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अच्छी-खासी दाक जम गई।
          
नेहरु जानते थे कि प्रकृति संपदा के अंधाधुंध दोहन, विभिन्न अर्थव्यवस्था की विरासतों के साथ भारत को अपनी मंजिल पानी है। विज्ञान के देशव्यापी विस्तार के लिए सबसे पहले वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान की स्थापना की गई, जिसके प्रथम निदेशक थे प्रोफ़ेसर शांति स्वरूप भटनागर और पंडित नेहरू अध्यक्ष थे।
देश में वैज्ञानिक अनुसंधान और वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार का माहौल बना। इतना ही नहीं बल्कि नेहरु जी ने विज्ञान नीति के कार्यक्रम के लिए अनेकों कदम उठाए थे।

The rise of science in India
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आइए जानते हैं वह क्या थे -
1. वैज्ञानिकों के समक्ष उन्होंने सामाजिक समस्याओं को रखा और उनके हल ढूंढने के लिए वैज्ञानिकों को उत्साहित किया।

2.विभिन्न समितियों में वैज्ञानिकों को सम्मिलित कर के प्रशासकों को विज्ञान की उपयोगिता के बारे में सजग(जाग्रत) किया है।

3. निर्णय लेने की प्रक्रिया में वैज्ञानिकों की सहभागिता की परंपरा उन्होंने आरंभ कर दी।

4.देश के सुधार कार्य में वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग किया तथा विभिन्न प्रणालियों को अपनाया और उन का निर्माण शुरू किया।

5.विज्ञान और प्रद्योगिकी को उन्होंने भरपूर समर्थन दिया।

6.उद्योगपतियों, प्रशासकों और अपनी पार्टी के कई विरोधियों के बावजूद भी देश के लिए उन्होंने पर्याप्त वैज्ञानिक आधार तैयार किए और बहुत मेहनत की।प्रयोगशाला में खुद ही जाकर शोध कार्यों और वहां हो रही प्रगति की जानकारी लेते रहते थे।

इस तरह से नेहरु जी ने विज्ञान में अपना विश्वास रखा और भविष्य के लिए उन्होंने विज्ञान को बढ़ावा दिया और वैज्ञानिकों से मित्रता रखी। साथ ही साथ विभिन्न संस्थान को स्थापित करने और शोध सुविधाएं प्रदान करने के लिए विज्ञान का सहारा लिया। उन्होंने अभिरुचि जागृत की और यह प्रयास भी किए और बार-बार वैज्ञानिकों का ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया। नेहरूजी विज्ञान और प्रौद्योगिकी को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बना देना चाहते थे और इस लिए उन्होंने प्रयासों की आधारशिला पर ही वैज्ञानिक भारत का शानदार भवन निर्माण और उनके अथक प्रयासों की आधारशिला पर ही आज वैज्ञानिक भारत का शानदार भवन निर्मित हो सका है।
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वैज्ञानिकों के प्रति मित्रता की भावना
     
वैज्ञानिकों के प्रति मित्रता की भावना नेहरु राजनीति की दुनिया की जीव थे लेकिन उनकी विज्ञान के प्रति अनन्य अभिरुचि थी। ये अपनी व्यस्तताओं के बीच भी समय निकालकर देश की प्रयोगशाला में जाते थे और वहां हो रही प्रगति का जायजा लेते रहते थे। इस मायने में नेहरू विश्व की राजनीतिक कार्यक्रमों में दुर्लभ और अच्छा प्रतिनिधित्व वाले व्यक्ति थे।  प्रयोगशाला में ये युवाओ की हौसला अफजाई करके उन्हें भी रोमांच से लवरेज कर देते थे उनका कहना था-
       
मैं जब अपने युवकों और युवतियों के चेहरे को देखता हूं तो मुझे उनमें कल के भारत की झलक मिलती है। वही रिएक्टर और ऐसी अनेक चीजों को आगे चलकर बनाएंगे और भारत का नक्शा बदल देंगे, भारत की विचारधारा बदल देंगे। जब मुझे कभी यहां आने का अवसर मिला, मुझे यहां काम करने वाले वैज्ञानिकों को देख कर खुशी हुई है, संतुष्टि मिली है, क्योंकि मुझे अपनी दृष्टि में भारत का भविष्य नजर आता है- उस भारत का जिसमें आत्मा के प्रति, विज्ञान में सत्य की खोज के प्रति, घिसी-पिटी बातों और पुरानी रूढ़ियों को छोड़कर आगे बढ़ने के प्रति आस्था रहती है । AD
परमाणु उर्जा रिएक्टरों के उद्घाटन के अवसर पर नेहरु जी ने यह बातें भी कही थी- यह सत्य है कि हम वर्तमान के लिए काम कर रहे हैं क्योंकि हम क्योंकि हम वर्तमान में रहते हैं किंतु अपने इस कार्य द्वारा हम भविष्य पर भी काबू पा लेंगे और स्वयं ही खुलकर हमारे सामने स्पष्ट हो जाएगा। इसलिए जब मैं इस शानदार गुंबज को देखता हूं तो मुझे खुशी मिलती है, उत्साह का अनुभव होता है। इस विशाल गुंबज के अतिरिक्त जिन्हें देखकर मुझे और भी अधिक आनंद और उत्साह का अनुभव होता है, वह है यहां पर काम करने वाले हजारों नौजवान वैज्ञानिक।  जब मैं उनके चमकते चेहरे को देखता हूं तो मुझे उनमें शक्ति के, उत्साह के और खोज के लिए इच्छुक दृष्टि के दर्शन होते हैं। तो इस तरह से नेहरू  जी की अपने युवाओं के प्रति,विज्ञान के प्रति मन में समर्पण की भावना थी।  

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