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» » » Durga ji ki aarti (मां दुर्गा जी की आरती)

मां जगत जननी सब पर कृपा करने वाली है। हम सभी भक्तजन इस नवरात्रि मां को प्रसन्न करने के लिए प्रार्थना करें, जिससे वह हमसे खुश हो जाए और हम सभी का कल्याण करें।

Durga ji ki aarti
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मां को खुश करने के लिए वह सभी कार्य करें, जो हमारे बस में हैं। मां अपने बच्चों का निरंतर ही भला चाहती है, मां अपने बच्चों पर हमेशा दृष्टि रखती है, अपनी कृपा बरसाती है।

जब हम मां की पूजा, आराधना करते हैं। जब हम मां जगत जननी की आरती करते हैं और आरती के बाद वंदना करते हैं। हमारी पूजा तभी सफल होती है।

वीडियो देखें क्लिक करें-



पूजा, हवन आदि के बाद हम आरती करें। जब तक आरती ना हो,  पूजा पूरी नहीं होती तो आइए जाने

दुर्गा मां की आरती के बाद हमें वंदना करना बेहद आवश्यक होता है। तभी हमारी पूजा सफल होती है और पूरी होती है।


Durga ji ki aarti
durga ji ki arti

  दुर्गा मां की आरती


जय अंबे गौरी मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी॥1॥
जय अंबे गौरी………………


मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद को। उज्जवल से दो नैना, चंद्रवदन नीको ॥2॥
जय अंबे गौरी………………


कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। रक्त पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥3॥
जय अंबे गौरी………………


केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुख हारी ॥4॥
जय अंबे गौरी………………


कानन कुंडल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥  
जय अंबे गौरी………………


शुंभ-निशुंभ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्रविलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥6॥
जय अंबे गौरी………………


चंड मुंड संहारे, शोणित बीज हरे।  मधु कैटभ दोऊ मारे, सुर भय हीन करे ॥7॥
जय अंबे गौरी………………


ब्रम्हाणी, रुद्राणी तुम कमला रानी। आगम - निगम - बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥
जय अंबे गौरी………………


चौंसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरौ। बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरू ॥9॥
जय अंबे गौरी………………
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता,सुख संपति करता॥10॥
जय अंबे गौरी………………

भुजा चार अति शोभित, वर- मुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर -नारी ॥11॥
जय अंबे गौरी………………

कंचन थाल विराजत अगर कपुर बाती। श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योती ॥12॥
जय अंबे गौरी………………

श्री अंबे जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी,सुख संपत्ति पावे॥13॥
जय अंबे गौरी………………


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