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» » » Nau ratri Mein Maa Durga ki Puja ka mahatva, नौ रात्रि में मां दुर्गा की पूजा का महत्व

दुर्गा मां के इन नामों के पीछे का रहस्य, मां के नौ रूपों की महिमा-
नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें। नवरात्रों के दिनों नौ देवियों, शक्तियों की नौ रुपों में पूजा, आराधना, वंदना की जाती है। दसवे दिन दशहरा मनाया जाता है। नवरात्रि साल में 4 बार आती है। जिनमें से दो नवरात्र गुप्त और दो नवरात्र सभी लोग धूमधाम से मनाते हैं।

Maa Durga ki Puja ka mahatva
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नवरात्रि में मां के 3 स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, मां सरस्वती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

मां जगतजननी समस्त कलेशों को हरने वाली है। इनकी आराधना से व्यक्ति के सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। और वह जीवन में सफलता प्राप्त करता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उपासना का अत्यंत महत्व है।

जीवन में अनेको कठिनाइयां परेशानियां आती रहती हैं। इनसे बचने के लिए हमें पूजा, आराधना, तपस्या, पाठ, मंत्रों की शक्ति आदि करना चाहिए। इनसे हमारी रक्षा होती है और हम अनहोनियों से बचे रहते हैं क्योंकि बिना उपासना के हम मुक्ति नहीं पा सकते।

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। सभी मनोरथ सफल होते हैं, हर कार्य में सफलता मिलती है, मुश्किले टल जाती हैं।

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शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय के घर में उत्पन्न होने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनका वाहन वृषभ है। यह सती के नाम से भी जानी जाती हैं। शैल पुत्री का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था। यह शिवजी की अर्द्धांगिनी बनी।

ब्रह्मचारिणी
भगवान शिवजी को पति के रुप में प्राप्त करने के लिए इन्होंने घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण देवी को तपचािरणी, ब्रम्हचारिणी का नाम दिया गया। यह ब्रम्ह का अर्थ तप से है।  ब्रम्हचारिणी अर्थात तप का आचरण करने वाली।

ब्रह्मचारिणी सर्वसिद्धि दायिनी है। जीवन के कठिन संघर्ष में भी मन विचलित ना होना ही ब्रहमचारिणी है।

Maa Durga ki Puja ka mahatva
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चंद्रघंटा
चंद्रघंटा शांतिदायक परम कल्याणकारी हैं।इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है, इनका शरीर सोने की तरह बहुत चमकीला है।

मां की घंटे की तरह भयानक ध्वनि से राक्षस, दानव, अत्याचारी, दैत्य सब कांपते हैं। मां के आशीर्वाद से हमें अद्भुत दृश्य, अद्भुत वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य अनुभूत होता है। और हमें कई तरह की ध्वनियां सुनाई देती हैं।

कूष्मांडा
कूष्मांडा अपनी मंद हल्की हंसी के द्वारा यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के करण इन देवी को कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ कुछ ना था तब इन देवी ने अपने मंद हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। रोग-शोक का नाश करने वाली, सुख-समृद्धि देने वाली मां कूष्मांडा है।

स्कंदमाता
स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंद माता के नाम से अभिहित किया गया है।

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कात्यायनी
महर्षि कात्यायन के घर में भगवती जगदंबा ने जन्म लिया था। महर्षि कात्यायन ने इनकी उपासना की थी और कठिन तप किया था। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो तो उन्होंने मां भगवती से उनके घर पर जन्म लेने के लिए प्रार्थना की। इसलिए मां देवी यहां जन्म लेने के कारण कात्यायनी कहलायी। कात्यायनी देवी अमोघ फलदायिनी हैं।


कालरात्रि
कालरात्रि इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह काला है। उनका रूप भयानक और सिर के बाल लंबे बिखरे हुए हैं। यह सभी राक्षसों, अत्याचारियों का विनाश करने वाली शक्ति है।

कालरात्रि काल से भी रक्षा करने वाली हैं। मां कालरात्रि के मुख से अग्नि निकलती रहती है। आसुरी शक्तियां इनके नाम से ही कांपती हैं। उनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।

महागौरी
महागौरी जिनका रूप पूर्णता गौर वर्ण है। उनके सभी आभूषण सफेद रंग के हैं। पति के रुप में शिव जी को प्राप्त करने के लिए इन्होंने घोर तपस्या की थी। इस वजह से इनके शरीर का रंग काला पड़ गया था।

शंकर जी ने प्रसन्न होकर उनके शरीर को गंगाजल गंगा जी के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया और उनका रूप गौर वर्ण का हो गया इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है।

सिद्धिदात्री
भगवान शिव ने भी इन्ही देवी की कृपा से यह तमाम सिद्धियां प्राप्त की थी। इस देवी की कृपा से ही शिव जी का आधा शरीर देवी का हुआ था। जिससे शिवजी अर्धनारेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

उनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य पल भर में संभव हो जाते हैं। इनकी आराधना से अमृतपद पाकर लोग स्वर्ग प्राप्त करते हैं।

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